Friday, February 16, 2024

एक चाहत हजार जज़्बातऔर एक तुम..
एक रूह हजार एहसास और एक तुम..

एक मैं हजार किस्से और एक तुम..
दो आँखें हजार सपने और एक तुम..

एक चाँद हजार तारे और एक तुम..
एक रात हजार करवटें और एक तुम..
एक  'हमसफ़र' हज़ार 'ख़ुशी ' बस सिर्फ तुम.....

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, February 13, 2024

तू नहीं तेरी तस्वीर ही सही, मुलाकातें तो होती है
तू कोई जवाब नहीं देती न सही, तुम से मेरी बाते तो होती है

संतुष्ट हो जाता है मेरा दिल ये सोच कर 
तुम मेरी जिंदगी में न सही मगर कहीं तो हो

तभी तो कुछ हवाएँ आकर मुझे ऐसे स्पर्श कर जाती
जैसे लगता तुमने मुझे गले लगाया।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Sunday, February 11, 2024

निपट अकेला इस दुनिया में डोल रहा मैं सारस,
तुझ बिन मेरा अरी संगिनी जीवन सूना नीरस।

पार गगन के कहाँ गई तू छोड़ मुझे धरती पर,
कण्ठ मेरा अवरुद्ध हो गया आवाजें दे देकर।

भरे हुए हैं निर्मल जल के नदियाँ और सरोवर,
पर मुझको तो प्यास बुझानी अपने आँसू पीकर।

नींद नहीं आती सपनों की गलियाँ भी अब सूनी,
मुझ विरही की विरह-वेदना बढ़ती हर दिन दूनी।

तड़प-तड़प कर ही कटते अब पल जीवन के सारे,
लगता मन को घेर रहे हैं आ-आकर अँधियारे।

अस्त हुई जाती है अब तो इस जीवन की संध्या,
समय पूर्व ही तोड़ रही दम हो आशाएँ वन्ध्या।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Wednesday, February 7, 2024

हमारा दिल नहीं लगता तुम्हारे_बिन कहां जायें
कहां खोजे वो नादाँ दिन पता कुछ हो तो बतलायें

चलो किसी गाँव मेँ ठहरें, झटक लें धूप जीवन की
या फिर पुलिया पे जा बैठे हवाएं नम नहर की हों

हाँ बैठे नीम के नीचे जहां कोयल कुहकती हो
भरें मुठ्ठी मेँ कुछ कंकड़ उछालें कम कभी ज्यादा

~~~~ सुनिल #शांडिल्य 

Monday, February 5, 2024

वो बारिश की बूंदे और तेरा बहकना
भीगे आँचल का तेरे सर से सरकना
मुझे बहुत याद आती है।

बागों के कलियों में भौरों का मंडराना
तुझे देख लेने तेरी गलियों से गुजरना
मुझे बहुत याद आती है।

वो छत पर खड़ी होकर गेसुये सुखाना
गलियों से गुजरते तुझसे नज़रे मिलाना
मुझे बहुत याद आती है।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Saturday, February 3, 2024

तेरा प्यार तो खुदा की नियामत है
और तेरा गुस्सा भी सौगात है मेरे लिए

माना बेकद्र हैं हम कुछ नहीं तेरे लिए
मगर क्या करे तू ही सबो शाम है मेरे लिए

तेरा प्यार सपनों से जागने नही देता है
और तेरा गुस्सा चैन से सोने नहीं देता है

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Thursday, February 1, 2024

भाषाओं की दुर्बलता थी कि
शब्दों के अर्थ सीमित रह गए
इसलिए मैंने हमारे मध्य
मौन को संवाद का माध्यम चुना

जहाँ भाषा नहीं,भावनाओं का संवाद होना था 
पर भूल गया मैं कि भावनाओं के 
संप्रेषण के लिए सिर्फ़ मौन नहीं
संवेदना से भरा एक हृदय भी अनिवार्य है
जो मौन को उसी के अर्थ में महसूस करे 

हमारे संवाद की विफलता प्रमाण है कि 
तुम्हारा प्रस्तर हृदय इस संवाद के सर्वथा अयोग्य है
तुम्हें भाषा नहीं, भावनाओं को पढ़ना होगा
तुम्हें शब्द नहीं, अनुभूतियों को गढ़ना होगा।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य