मुझमे खुशबू बसी उसकी हैजैसे ये ज़िन्दगी उसकी हैवो कही आसपास है मेरेहो ना हो ये हंसी उसी की हैअब तो ये ख्वाब भी नही मेरे
अब तो ये नींद भी उसी की है
या तो कोई कमी नही मुझमे
या फिर मुझमे कमी उसकी है
ना शिकवा किसी का ,ना फरियाद किसी की
होनी थी यूँ ही जिंदगी, बर्बाद किसी की ...
अहसास मिटा,तलाश मिटी, मिट गई उम्मीदें .....
सब मिट गया पर न मिट सकी याद किसी की ...!
चिराग बुझते रहे और ख्वाब जलते रहेसिसक सिसक के जिंदगी के साँस चलते रहे|मुझे तडफता हुआ छोड कर चले जाने वाले मेरे गम ना कम हुए, बस दिन ढलते रहे ||
मैं क़तरा होकर भी तूफां से जंग लेता हूं !
मेरा बचना समंदर की जिम्मेदारी है !!दुआ करो कि सलामत रहे मेरी हिम्मत !
यह एक चिराग कई आंधियों पर भारी है !!
साहिल पे पहुंचने से इनकार किसे है लेकिन;
तूफ़ान से लड़ने का मज़ा ही कुछ और है;
कहते है, कि किस्मत खुदा लिखता है लेकिन;
उसे मिटा के खुद गढ़ने का मजा ही कुछ और है।
कोई समझता नहीं उसे इसका गम नहीं करता;
पर तेरे नजरंदाज करने पर हल्का सा मुस्कुरा देता है;
उसकी हंसी में छुपे दर्द को महसूस तो कर;
वो तो हंस के यूँ ही खुद को सजा देता है।
प्यासे को इक कतरा पानी ही काफी है;
इश्क में चार पल की जिंदगानी ही काफी है;
हम डूबने को समँदर में भला जाए क्यो;
उनकी पलको से टपका वो आंसू ही काफी है।