Thursday, October 27, 2016

ऐ खुदा मुझ को मेरी इबादत के बदले मोहब्बत दे दे
मैं तेरी किसी भी जन्नत का खरीदार नहीं....

हर बात पे कटती है तो कट जाए जुबा मेरी
इज़हार तो हो ही जाएगा जो बहेगा लहू मेरा...

उसे सोचना चाहिए था हर सितम से पहले
मैं सिर्फ माशूका ही नहीं इंसान भी थी

Friday, October 21, 2016

सदा जो दिल से निकल रही है
वो शेर-ओ-नग्मों में ढल रही है
कि दिल के आँगन में जैसे
कोई गजल की झाँझर झनक रही है

तू अश्क ही बन के मेरी आँखों में समा जा
मैं आईना देखूँ तो तेरा अक्स भी देखूँ.....

कितनी सदियाँ सोच में खोया रहा कुदरत का हाथ...
फिर तेरी आँखे बनाई फिर बनाई काएनात ..

Thursday, October 20, 2016

सितम हवा का अगर तेरे तन को रास नहीं
कहां से लाऊं वो झोंका जो मेरे पास नहीं
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वजीर आगा