Monday, December 30, 2024
याद आती रही शब्द जुड़ते गए
नाम लिखता रहा गीत बनता गया
एक चेहरा टँगा रहा चाँद सा
काफिला तारों का गुज़रता गया
दूरियाँ न हटीं चाहतें न घटीं
प्यार का सिलसिला यूँ ही चलता रहा
तेरे मिलने की उम्मीद रही सुबह तक
मैं भी करवट पे करवट बदलता रहा
~~~~ सुनिल #शांडिल्य
Sunday, December 29, 2024
रूप-यौवन, मदन वेग छाया हुआ
दूध-केशर से मल-मल नहाया हुआ।
ये बदन भीगा बरखा में,लगता है यूँ।
खूब फ़ुरसत में रब का बनाया हुआ।
ये कमल पांखुरी तन,सरिता-कटि,
दृष्टि उतराये ,गहरी लगे घाटियाँ ।
कहीं मैले न हो,पाँव छू कर ज़मीं,
मरमरी-बाँहों में 'गर,घिरे वादियाँ ।।
~~~~ सुनिल #शांडिल्य
Friday, December 20, 2024
बिते लम्हों को यूं तो हम भुला देते हैं
जब भी याद आते है मुस्कुरा देते हैं
झड़ने लगते है अहसासों के सुमन
यादों की टहनी जब भी हिला देते हैं
तन्हाई में भी तन्हा फिर होते नहीं हम
सहरा में भी शुकून का मेला लगा देते हैं
~~~~ सुनिल #शांडिल्य
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