Monday, December 30, 2024
याद आती रही शब्द जुड़ते गए
नाम लिखता रहा गीत बनता गया
एक चेहरा टँगा रहा चाँद सा
काफिला तारों का गुज़रता गया
दूरियाँ न हटीं चाहतें न घटीं
प्यार का सिलसिला यूँ ही चलता रहा
तेरे मिलने की उम्मीद रही सुबह तक
मैं भी करवट पे करवट बदलता रहा
~~~~ सुनिल #शांडिल्य
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