Friday, December 20, 2024
बिते लम्हों को यूं तो हम भुला देते हैं
जब भी याद आते है मुस्कुरा देते हैं
झड़ने लगते है अहसासों के सुमन
यादों की टहनी जब भी हिला देते हैं
तन्हाई में भी तन्हा फिर होते नहीं हम
सहरा में भी शुकून का मेला लगा देते हैं
~~~~ सुनिल #शांडिल्य
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