चलती नहीं लेखनी तुम बिन
सूख गये सपनों के सागर
भावों की नदियाँ सूख गयीं
सूनी है जीवनकी गागर
बिन बरसे तुम चले गयीं
कैसे में खुशहाल दिखूँ
है सजीव जीवन का वो पल
पहली बार जब मिले थे तुम
छोटी सी एक छेड़छाड़ से
प्रेमपाश में बंधे थे तुम
सोच नहीं सकता विछोह में
किससे दिल का हाल कहूं
~~~~ सुनिल #शांडिल्य
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