Thursday, January 2, 2025

चलती नहीं लेखनी तुम बिन
सूख गये सपनों के सागर

भावों की नदियाँ सूख गयीं
सूनी है जीवनकी गागर

बिन बरसे तुम चले गयीं
कैसे में खुशहाल दिखूँ

है सजीव जीवन का वो पल
पहली बार जब मिले थे तुम

छोटी सी एक छेड़छाड़ से
प्रेमपाश में बंधे थे तुम

सोच नहीं सकता विछोह में
किससे दिल का हाल कहूं

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

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