Sunday, February 16, 2025

तुमसे मिलने को दिल ये मचलता रहा
याद में दिल तुम्हारी ही जलता रहा।

कट रही रात तेरी ज़ुदाई में ये
मेरी आंखों से सावन बरसता रहा।

किस कदर संगदिल आपका हो गया
मोम जैसा मेरा दिल पिघलता रहा ।

चांदनी रात दिल को जलाती रही
मेरी हालत पे  ये चांद हंसता रहा।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

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