Tuesday, February 18, 2025

मन प्रफ़ुल्लित जब हुआ 
तब प्रकट कविता हुई, 
शब्द का मोती चुना जब 
काव्य तब सविता हुई, 

लेखनी मे बंध गयी जब 
बन गयी वो हार जैसा, 
प्रेम का धागा पिरोया,
बन गयी वो यार जैसा,
 
प्यास सुनने की हुआ जब,
काव्य तब सरिता हुई, 
मन प्रफ़ुल्लित जब हुआ,
तब प्रकट कविता हुई।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

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