Thursday, April 17, 2025

खिली सी रंगत पर,हजारों रंगीन अफ़साने लिखे 
बेगैरत सादगी आ कर क्यों,मौसम बिगाड़ देती है ??

खिली हो धूप-छांव में,तमस में चांदनी का जलवा
खामोशी छेड़ती है राग,नीरव में गजल का मसला

अनजान सी रागिनी आकर,तरन्नुम बिगाड़ देती है
बेगैरत सादगी आ कर क्यों,मौसम बिगाड़ देती है

#शांडिल्य

No comments:

Post a Comment