Friday, May 23, 2025
रात अब गहरी हो चली पलकें भारी है,
आंखों पर मगर ख्वाबों की पहरेदारी है..
मंजिल के दीदार में अभी वक्त लगेगा,
उसी वक्त के इंतजार में सफ़र जारी है
हालात हक में हों या खड़े हों मुकाबिल
हर जंग में फतह करना मेरी जिम्मेदारी है
#शांडिल्य
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