आत्मिक प्रेम है तुमसे मानसिक प्रेम है तुमसे,
देह पूर्णतः गौण है इसमें स्वार्थ भी मौन है इसमें !!
दैहिक स्पर्श से अधिक मानसिक स्पर्श है तुमसे,
समक्ष उपस्थित नहीं हो स्मरण संवाद है तुमसे!!
आर्कषण नहीं तुमसे आत्मा के नव कोपल हो,
मन की मरुभूमि में स्थित दुर्लभ श्वेत कमल हो!
#शांडिल्य
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