Friday, May 30, 2025

मखमली कोहरा गुलाबी चेहरा
प्यासी निगाहों पे सर्दसा पैहरा

गुनगुनी धूपसी मीठी यादें
दिलमें इक हूल उठायें गहरा

शाख पे शबनम लिपट युँ जाती है
ज्यूँ पुरवइया पहाड़ों पे गाती है

पायलकी झंकार दे पुकारले अबतो
कुछ हसीं लम्हे उधार दे अबतो

सब वादे चल असल करलें 
चल पहाड़ों को अपना घर करले

#शांडिल्य

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