मखमली कोहरा गुलाबी चेहरा
प्यासी निगाहों पे सर्दसा पैहरा
गुनगुनी धूपसी मीठी यादें
दिलमें इक हूल उठायें गहरा
शाख पे शबनम लिपट युँ जाती है
ज्यूँ पुरवइया पहाड़ों पे गाती है
पायलकी झंकार दे पुकारले अबतो
कुछ हसीं लम्हे उधार दे अबतो
सब वादे चल असल करलें
चल पहाड़ों को अपना घर करले
#शांडिल्य
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