Monday, June 2, 2025

मौन अधर,क्या लिखूँ पीर जो मंत्रहीन
निर्मोही प्रियतम,चलत यायावरी हीन

शब्द विहीन,संज्ञा हीन,है स्व में लीन
शोरगुल से दूर,बेचैन मन है गतिहीन

दामिनी तीर,निर्झरिणी नीर,तरंग हीन
अशांत चित्त,किस निमित अंतरहीन

दरस दो मेरे हमजोली,बन संकोचहीन
प्रतीक्षारत मौन अधर,हो जाओ लीन

#शांडिल्य

No comments:

Post a Comment