तेरे भीगे बदन की खुशबु से
लहरें भी हुयी मस्तानी सी
तेरी ज़ुल्फ़ को छू कर आज हुई
खामोश हवा दीवानी सी
यह रूप का कुंदन देखा हुआ
यह जिस्म का चन्दन महका हुआ
बिखरा हुवा काजल आँखों में
तूफान की हलचल साँसों में
ये नरम लबो की ख़ामोशी
पलकों में छुपी हैरानी सी
#शांडिल्य
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