Tuesday, June 24, 2025

तेरे भीगे बदन की खुशबु से
लहरें भी हुयी मस्तानी सी

तेरी ज़ुल्फ़ को छू कर आज हुई
खामोश हवा दीवानी सी

यह रूप का कुंदन देखा हुआ
यह जिस्म का चन्दन महका हुआ

बिखरा हुवा काजल आँखों में
तूफान की हलचल साँसों में

ये नरम लबो की ख़ामोशी
पलकों में छुपी हैरानी सी

#शांडिल्य

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