पुरुष में प्रेम अनंत ब्रह्माण्ड जितना होता है,
जबकि मौन होता है सागर की तरह,
भाव से भरा वह भी चाहता है
बालक सा चंचल होना,
नदियों की तरह बहना
पर .....ये संसार पुरुष को ऐसा देखने की आदी नहीं,
अंततः वह इन सब को दबाए रख कठोर
होने का दिखावा करता है...!!
#शांडिल्य
No comments:
Post a Comment