Saturday, June 28, 2025

तेरी कंचन कंचन काया सिन्दुरी 
तेरी चंचल_चंचल छाया सिन्दुरी 
रात भले कितनी भी चांदी बरसी हो 
सुबह सुबह मन को बस भाया सिन्दुरी 
तेरे अक्स से जल हो आया सिन्दुरी 
माथे की बिन्दी मै लाया सिन्दुरी 
ओंठ भले हो तेरे सुर्ख मलाई से 
श्याम वर्ण पर ठप्पा आया सिन्दुरी 
श्वेत हंस सुबह उड़ हो आया सिन्दुरी 
हरी घांस शबनम जम आया सिन्दुरी 
कलियां तेरी आँखो जैसी गुलाबी हैं 
हिम खण्डों पे स्वर्ण पताका सिन्दुरी 
मंदिर से जैसे दिया हूँ लाया सिन्दुरी 
तूने घर को भोर सजाया सिन्दुरी 
जाने ख्वाब य़ा सच मे कोई हकिकत है 
जब दिल जला धुआं बस आया सिन्दुरी

#शांडिल्य

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