मंद-मंद पुरबैया बहके,बनके मलय बयार
बन बसंत लहराऊं मैं तो, जैसे अमुआ की डार
मन मुरझाया खिल खिल जाये,पाकर तेरा प्यार
स्वच्छ सरोवर सी बन जाओ,मस्त मलिन इक नार
मिलन सफल हो आज हमारा,बनके एक बहार
पग पग,पल पल खुशियां महकें,बनके गुल कचनार
फगुनी बसंत सा मैं आऊंगा,महके यह संसार
#शांडिल्य
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