ना किस्से ना बाते
ना वादे ना ही मुलाकातें
कोई याद बाकी नही
कोई चाह अब आधी नही
था एक फरेब वो बस
नासमझी में उसको
खुदा बना दिया
और देखो खुदा बनकर
वो मेरी ही किस्मत मिटा गई
बस एक उम्मीद ही थी
उसे अपना बनाने की
एक रंगीन दुनिया सजाने की
जाने कैसी थी वो रात
एक झटके में सब बदल गया
#शांडिल्य
No comments:
Post a Comment