Sunday, November 9, 2025

अगन में मगन हो के मन सो गया 
हमने सोचा था कुछ, और कुछ हो गया

सुंदर सौम्य सघन घन में मंजुल मृदुल मुखर मन में 
मादक मदिरा मुस्काती प्रीत चपल चंदन वन में 

त्रस्त ताप तपते तन में तर्से तृप्ति तड़ित त्रण में 
निष्ठुर सांसों के व्यतिक्रम कर्म दोष ज्यों जीवन  में

#शांडिल्य

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