ख्याल कुछ
भीगे भीगे से हैं
मन की ज़मीन भी गीली है
लगता है
आज फिर से
यादों की फुहारें बरसी हैं।
ज़िन्दगी
मीठी-मीठी सी है
मन में भी है मिठास घुली
लगता है
होठों ने आज फिर
तेरे नाम की मिश्री चख ली है...
आज हवाओं में
फिर से मुझको
एक पहचानी महक मिली है...
शायद तेरे साये को
छूकर
हवा कहीं से गुजरी है...
#शांडिल्य
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