Saturday, December 6, 2025

ख्याल कुछ
भीगे भीगे से हैं
मन की ज़मीन भी गीली  है

लगता है
आज फिर से 
यादों की फुहारें बरसी हैं। 

ज़िन्दगी
मीठी-मीठी सी है
मन में भी है मिठास घुली

लगता है
होठों ने आज फिर
तेरे नाम की मिश्री चख ली है...

आज हवाओं में 
फिर से मुझको 
एक पहचानी महक मिली है...

शायद तेरे साये को
छूकर
हवा कहीं से गुजरी है...

#शांडिल्य

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