दिल ने जब भी तुझे चुपके से पुकारा है,
तेरी यादों ने मुझे आकर सँवारा है।
दूर होकर भी तू दिल से कहाँ दूर हुआ,
तेरा एहसास ही जीने का सहारा है।
रात तन्हा हो तो आवाज़ तेरी आती है,
जैसे खामोश फ़िज़ाओं ने पुकारा है।
जिसे दुनिया ने समझा था मेरा ख़्वाब कभी,
वही ख़्वाब आज भी दिल को प्यारा है।
#शांडिल्य
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