Sunday, October 4, 2026

खुश्बू

तुम्हारी स्मृतियों की ख़ुशबू से महकता है मन,
जैसे सावन में कोई वन महकता है मन।

फूल झर जाएँ, ऋतुएँ भी बदल जाएँ अगर,
तुम्हारे होने से फिर भी महकता है मन।

तुम्हारी आहट की नरम धूप उतरती है जब,
सूना-सा कोई आँगन भी चहकता है मन।

दूरियों ने तो बहुत कुछ है छुपाया हमसे,
तुम्हारी ख़ुशबू से मगर तुमको परखता है मन।

#शांडिल्य