Wednesday, October 8, 2014

दर्द को भी दर्द होने लगा,दर्द खुद ही मेरे घाव धोने लगा ,दर्द के लिए मैं न रोया, लेकिन दर्द मुझे छू कर, खुद रोने लगा

आंसुओं के गिरने की आहट नहीं होती,
दिल के टूटने की आवाज़ नहीं होती,

अगर होता खुदा को एहसास दर्द का,
तो उसे दर्द देने की आदत नहीं होती......

Monday, October 6, 2014

हमे भी प्यार करने का ख्याल आया ,
जब भी यह ख्याल आया खुद को अकेला पाया ,
ढून्डते रहे इस दुनिया मैं हमसफ़र ,
किसी को धोके बाज़ , किसी को बेवफा ही पाया …

सुबह को सूरज ने झांका, रोशनी अच्छी लगी
शब् को अपनी छत पे बैठी, चांदनी अच्छी लगी

खेत की मेड़ों पे पायल-गीत, लगता है भला
गाँव की गलियों में फिरती, रागिनी अच्छी लगी

दिल में हो नफ़रत ओत दिन भी रात की मानिंद
हो मुहब्बत की किरण, तो रात भी अच्छी लगी

यूं तो सब कहते हैं, ये हैवानियत का दौर है
आदमी की आदमियत आज भी अच्छी लगी

भूख क्या ? आते में जब डाला है मेहनत का नमक
रूखी सूखी जैसी भी रोटी बनी, अच्छी लगी

एक बूढ़े पेड़ के साए तले दोस्तो हमें
दूसरों को छाँव देती ज़िन्दगी, अच्छी लगी

मत पूछो मेरे दिल का हाल
आपके दिल भी बिखर जायेंगे
इस लिए नहीं सुनाते अपने दिल का दर्द किसी को
ये सुनके तो तन्हाई के भी आंसू निकल आयेंगे

तुम से मिले बिछड़ गए तुम से बिछड़ के मिल गए..
ऐसी भी कुर्बतें रहें ऐसे भी फासले रहे..
तू भी ना मिल सका हमें उम्र भी रेगन गए...
तुझ से तो खैर इश्क था खुद से बड़े गिले रहे...

रास्ता टूट गया मगर सफर अभी बाकी है
आइना टूट गया मगर नजर अभी बाकी है
तुम हमेशा कितनी भी दूर रहो,
पर तुम्हारी याद दिल में हमेशा बाकी है