Wednesday, February 22, 2017

मेरी ज़बां से मेरा ही अफ़साना बिखरा
ढ़ूँढ़ो कहां जाने ये दिल दीवाना बिखरानाकाम मै है इस से भी ग़ारत नहीं ग़मटूटा जो दिल ये मेरा तो मैखाना बिखराजो था खुदा वो कितना है मायूस देखोवो बिखरी मस्जिद ये बुतखाना बिखराकिस सिम्त जाऊं ले कर मै ग़म-ए-दिलबिखरा है हर अपना, हर बेगाना बिखरा

Thursday, February 16, 2017

मेरे ख्वाबो में रंग उसने भरे,
फूल मेरे नाम के किताबों में उसने धरे।
दिल धड़कता है जब पहन कर वो हिजाब आए,
क्या हो हशर मेरा जो कभी वो बे नकाब आए।

Wednesday, February 15, 2017

तुम्हे जब कभी मिले फुरसतें मेरे दिल से नाम उतार दो,
मैं बहोत दिनों से उदास हूँ मुझे एक शाम उधार दो।
मुझे अपने रंग में रंग दो मेरे सारे जंग उतार दो,
मुझे अपने रंग की धूप दो गमो को मेरे जार दो।

समझता हूँ में जज़्बात तेरे मेरी बात भी तू समझ ज़रा
नाम उसका तू बार बार न ले
कही यह दिल उससे बेवफी न दे दे
चिलमन में आग लगी,है कोई मुझे पानी देदे
गुलिस्ता झुलज़ रहा है,
कोई मुझे दो पल की रवानी देदे
गगन चुंबति यह लपते भस्म कर देंगी मुझे
दिल मैं दफ़न है कई राज़
कोई इस तन्हा दिल तो पनहा देदे
दिल की आच में तो मैं पहेले से ही झुलज़ रहा हूँ
कोरी सदी सुखी है साँसे

कोई मेरी ज़िंदगी को एक कहानी देदे

Monday, February 13, 2017

क्यों बेकसी को जुर्म सा सहते रहे हम...
रेत कि दीवारों से दहते रहे हम....

रोशनी तुमको देने के बाद...
किस कदर अंधेरों में रहते रहे हम...

यूं तो थी मुझको भी साहिल कि तलाश....
हुआ इश्क मोजों से तो बहते रहे हम....

कुछ शब्द चुपके से आते हैं.,विस्मृत स्मृतियों पर,
धीरे से दस्तक दे जातें हैं..
अब नहीं पिरो पाता हूँ, इनको अपनी कविता में..
अब नहीं दे पाता हूँ ,इन शब्दों को अपनी आवाज..
अब जब नहीं हो तुम मेरे पास

अपने प्यार अपने जज़्बात से हार गया
सब कुछ लूट के बिखर सा गया
कितने बार मुझे आपने सफ़ी देनी होगी
आपने वजूद से जयदा उन्हे करार दिया

वो क्यो मुझसे यह बात छुपाते होगे
उनके चेहरे ने हाल-ए-दिल बयान किया