Tuesday, June 9, 2015

तेरी दूरी का एहसास सताने लगा,
तेरे साथ गुजारा हर लम्हा याद आने लगा;
जब भी तुझे भूलने की कोशिश की,
तू दिल के और करीब आने लगा|

जिन्दगी को गले लगाने को दिल चाहता है,
मौत से हाथ मिलाने को दिल चाहता है;
जब आती है याद तुम्हारी तो,
पास आने को दिल चाहता है|

दिल की हालत यूँ बयान हुई
कुछ इधर गिरा कुछ उधर गिरा
राह-ए-उल्फत का ये नजराना है जालिम
न वो तुझे मिला न वो मुझे मिला
चाँद खिला पर रौशनी न आई
रात बीती पर दिन न चढ़ा
अर्श से फर्श तक के सफर मे
कमबख्त रौशनी तबाह हो गयी

दिल की हालत यू बयान हुई

Monday, June 8, 2015

जैसे आँखों को मोहब्बत है ख्वाबों से,
ख्वाबों को मोहब्बत है रातों से;
जैसे दिल को मोहब्बत है दिलबर से,
मुझ को मोहब्बत है आपसे|

जब से उस पर दिल आया है,
मुझे हर शख्श लगता पराया है;
मुझ पर उसका खुमार छाया है,
जिसने मेरा दिल चुराया है|

हम पीना चाहते हैं उनकी निगाहों से,
जीने चाहते हैं उनकी पनाहों में,
हम चलना चाहते हैं उनकी राहों में,
मरना चाहते हैं उनकी बाहों में|

मै अल्फाज़ हूँ आपकी हर बात समझता हूँ
मै अहेसाह हूँ आपके ज़ज्बात समझता हूँ
कब पूछा मैंने की क्यू दूर हो मुझसे
मै दिल रखता हूँ आपके हालात समझता हूँ