Thursday, February 18, 2016

दिल से पुकारूँ तुझे ए मंज़िल तू है कहाँ
यह कदम अब थम से रहे है ए खुदा तू है कहाँ
ऐसे चुप हैं के ये मन्ज़िल भी कड़ी हो जैसे,
तेरा मिलना भी जुदाई की घड़ी हो जैसे |
-अहमद फ़राज़
मंजिल न दे, चराग न दे, हौंसला तो दे
तिनके का ही सही तू मगर आसरा तो दे |
-राणा सहरी
आसरा = सहारा
हर मील के पत्थर पर लिख दो यह इबारत,
मंजिल नहीं मिलती, नाकाम इरादों से।

हजार नाकामियाँ हों 'नश्तर' हजार गुमराहियाँ हों लेकिन,
तलाशे-मंजिल है अगर दिल से, तो एक दिन लाजिमी मिलेगी।
-
हरगोविंद दयाल 'नश्तर'

सिर्फ इक कदम उठा था गलत राहे-शौक में,
मंजिल तमाम उम्र मुझे ढूँढ़ती रही।
-
अब्दुल हमी अदम

सफर में सईए-कामिल हो तो निकले राह मंजिल की,
कि दरिया की रवानी से, बिना पड़ती है साहिल की।
-
नातिक लखनवी
1.
सईए-कामिल - मुकम्मल प्रयास, पूरी कोशिश, पराक्रम
2.
रवानी - प्रवाह, बहाव, धार 3. साहिल - किनारा, तट