दिल से पुकारूँ तुझेए मंज़िल तू है
कहाँ यह कदम अब थम से रहे हैए खुदा तू है कहाँ
ऐसे चुप हैं के ये मन्ज़िल भी कड़ी हो जैसे, तेरा मिलना भी जुदाई की घड़ी हो जैसे | -अहमद फ़राज़
मंजिल न दे, चराग न दे, हौंसला तो दे तिनके का ही सही तू मगर आसरा तो दे | -राणा सहरी आसरा = सहारा
हर मील के पत्थर पर लिख दो
यह इबारत, मंजिल नहीं मिलती, नाकाम इरादों से।
हजार नाकामियाँ हों 'नश्तर' हजार गुमराहियाँ हों लेकिन, तलाशे-मंजिल है अगर दिल से, तो एक दिन लाजिमी मिलेगी।
-हरगोविंद दयाल 'नश्तर'
सिर्फ इक कदम उठा था गलत
राहे-शौक में, मंजिल तमाम उम्र मुझे ढूँढ़ती रही।
-अब्दुल हमी अदम
सफर में सईए-कामिल हो तो
निकले राह मंजिल की, कि दरिया की रवानी से, बिना पड़ती है साहिल की।
-नातिक लखनवी
1.सईए-कामिल - मुकम्मल प्रयास, पूरी कोशिश, पराक्रम
2. रवानी - प्रवाह, बहाव, धार 3. साहिल - किनारा, तट