Thursday, November 28, 2024

क्या लिखूं कैसे लिखूं लिखना जरूरी है
आईने को सामने रखना जरूरी है

राह खुद ब खुद मंजिल बन जाएगी
एक बार तेरा प्यार में पडना जरुरी है

पछताएगा एक दिन समय जाएगा बीतl
बौराए हैं आम तो सजनी जरुरी है

निश्चित ही मिल जाएगी मंजिल मगर
जीवन का लंबा सफर चलना जरूरी है...!!!

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Sunday, November 24, 2024

तेरे दिल में थोड़ी पनाह चाहता हूं
ए सनम मोहब्बत बेपनाह चाहता हूं

तुझे पा सकुं, ऐसी तकदीर मिल जाए
तेरी रहनुमाई में उम्र बीत जाए

दर्द ए मोहब्बत से निजात चाहता हूं
प्यार की एक बरसात चाहता हूं

हर रस्म की एक गांठ चाहता हूं
ताउम्र के लिए सांठगांठ चाहता हूं

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Friday, November 15, 2024

चाँद से फिर जा मिलेगी देखना
रात आख़िर जग पड़ेगी देखना

नींद कच्ची रात की होती बहुत
साथ ही चलती रहेगी देखना

रात हरदम ढूँढती है चाँद को
हर फ़साना मिल कहेगी देखना

क्यूँ अमावस रात होती बाँवरी ?
चाँद बिन तनहा कटेगी देखना

जब जमीं पर चाँद की किरणें पड़ें
रात की बाँछें खिलेगी देखना

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Thursday, November 7, 2024

कितने मेरे पास हो तुम
सबसे मेरे खास हो तुम
विस्मृत सारे दृश्य हो गए
कितना सुंदर एहसास हो तुम

मै अकिंचन खड़ा हुआ
द्वार पे तेरे अड़ा हुआ
आतुर..छवि को निहारूँ मै
कितना मनमोहक आभास हो तुम

दृग कितने हैं चंचल तेरे
हिय में करते हलचल मेरे
मदमाते अधरों पर रक्त वर्ण
मुखड़ा, लिए सुहास हो तुम

शीत ऋतु सा शीतल मन है
गर्माहट में पुरवाई पवन है
वासंती बयार लिए 
दिखते प्यारा मधुमास हो तुम

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, November 5, 2024

चल आज फिर बैठते हैं
शीतल आम की छांव में
कुछ तुम कहना कुछ हम
गौर से सुनना उन चिड़ियों
की चहचाहट में...
कौवे की कांव कांव में
और पास फुदकती
उस मैना की शर्माहट में
उस गाँव की सौंधी मिट्टी में
जो हमसे बहुत दूर छूट गई है।।
याद है न हम कितना लड़ते थे
इसी पेड़ की कसम खाकर

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Sunday, November 3, 2024

मैं अमलतास, तू गुलमोहर,
दोनों का रूप निराला है!

मैं कुन्दन सा चमकता हूँ,
तो तू अग्नि की ज्वाला है!!

सूरज की जितनी तपिस होगी,
उतना ही रूप निखरेगा!

जब भी ग्रीष्म का आगमन होगा,
रूप दोनों का बिखरेगा!!

ज्येष्ठ की तपती दोहपरी में,
हम शीतलता के प्रतीक होंगे!!

~~~~ सुनिल #शांडिल्य