Friday, July 4, 2025

मनभावन से भाव सृजन का 
अनुपम गीत बन गई तुम..!

छेड़ा मन का वाद्ययंत्र 
एक सुर संगीत बन गई तुम..!

सुघड़ प्रीत का थाल सजाये 
ड्योढ़ी पर ही ठिठकी हो,

उर-पट खोल बलैयां लेलूँ
सांची मीत बन गई तुम..!

#शांडिल्य

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