ओढ़नी जब लहराती है हवा के संग,
लगता है जैसे मौसम गुनगुनाता है।
कभी रंगों में सिमटती है कोई चाहत,
कभी चेहरे पर आकर शर्माती है।
उसकी हर सिलवट में छुपी है कहानी,
जो बिना कहे भी दिल को समझाती है।
ओढ़नी सिर्फ़ कपड़ा नहीं होती,
किसी की यादों की खुशबू बन जाती है।
#शांडिल्य
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