Monday, August 31, 2026

ओढ़नी जब लहराती है हवा के संग,
लगता है जैसे मौसम गुनगुनाता है।

कभी रंगों में सिमटती है कोई चाहत,
कभी चेहरे पर आकर शर्माती है।

उसकी हर सिलवट में छुपी है कहानी,
जो बिना कहे भी दिल को समझाती है।

ओढ़नी सिर्फ़ कपड़ा नहीं होती,
किसी की यादों की खुशबू बन जाती है।

#शांडिल्य

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