Saturday, October 17, 2026

गुज़ारिश

मेरी ख़ामोशी को भी आवाज़ दीजिए, 
कभी तो दिल से हमें याद कीजिए।

हर बार लफ़्ज़ों में कहें, ये ज़रूरी नहीं, 
नज़रों से भी कभी गुज़ारिश कीजिए।

कुछ दर्द छुपे हैं मुस्कुराहट के पीछे, 
कभी बैठकर उनका भी ज़िक्र कीजिए।

बस इतनी-सी है शांडिल्य की गुज़ारिश, 
रिश्ता निभाइए, न वादा कोई कीजिए। 

#शांडिल्य

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