Thursday, November 7, 2024

कितने मेरे पास हो तुम
सबसे मेरे खास हो तुम
विस्मृत सारे दृश्य हो गए
कितना सुंदर एहसास हो तुम

मै अकिंचन खड़ा हुआ
द्वार पे तेरे अड़ा हुआ
आतुर..छवि को निहारूँ मै
कितना मनमोहक आभास हो तुम

दृग कितने हैं चंचल तेरे
हिय में करते हलचल मेरे
मदमाते अधरों पर रक्त वर्ण
मुखड़ा, लिए सुहास हो तुम

शीत ऋतु सा शीतल मन है
गर्माहट में पुरवाई पवन है
वासंती बयार लिए 
दिखते प्यारा मधुमास हो तुम

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, November 5, 2024

चल आज फिर बैठते हैं
शीतल आम की छांव में
कुछ तुम कहना कुछ हम
गौर से सुनना उन चिड़ियों
की चहचाहट में...
कौवे की कांव कांव में
और पास फुदकती
उस मैना की शर्माहट में
उस गाँव की सौंधी मिट्टी में
जो हमसे बहुत दूर छूट गई है।।
याद है न हम कितना लड़ते थे
इसी पेड़ की कसम खाकर

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Sunday, November 3, 2024

मैं अमलतास, तू गुलमोहर,
दोनों का रूप निराला है!

मैं कुन्दन सा चमकता हूँ,
तो तू अग्नि की ज्वाला है!!

सूरज की जितनी तपिस होगी,
उतना ही रूप निखरेगा!

जब भी ग्रीष्म का आगमन होगा,
रूप दोनों का बिखरेगा!!

ज्येष्ठ की तपती दोहपरी में,
हम शीतलता के प्रतीक होंगे!!

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, October 29, 2024

प्यार की धार को जीवन का प्राणाधार कर दो तुम,
नज़र के तीर को..मेरे जिगर के पार कर दो तुम।

कई जन्मों के..गूंगे भाव..जो मन में समाए हैं,
उन्हें वाणी का रस देकर मेरा उद्धार कर दो तुम।

अधर प्यासे हैं सदियों से जाएगा कब अधूरापन,
बहार बन कर छा जाओ मधुर बौछार कर दो तुम।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Sunday, October 27, 2024

ज़िंदगी मुश्किल बड़ी पर मुस्कुराना सीख ले 
ये नहीं मुश्किल तू सबको ये बताना सीख ले 

आयेंगी यहाँ आँधियाँ तूफ़ान भी हर राह में 
पर अडिग हो राह में तू जीत जाना सीख ले 

पलकों के कोरों में तू आँसू छिपाना सीख ले 
ज़िंदगी छोटी बहुत पर गुन गुनाना सीख ले 

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, October 22, 2024

हिम्मतसे बढ़ती है ताकत
एकजुटता से बढ़ती एकता
प्यार बढ़ता साझा करनेसे
परवाह से बढ़ती एकरूपता
छू ना पायेगा कोमल हृदय
किसीके भी कठोर शब्द
छू जाएंगे कठोर हृदयभी
हँसमुख तेरे कोमल शब्द
पढ़सकते हो तो दर्द पढ़ना
किसीके भी दिलके भीतर
शान्त सा दिखने वाला लगे
कितने दर्द समेट रखे हमने 

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Sunday, October 20, 2024

राधा के होंठ
गुनगुनाते फाग
बांसुरी मौन।

राधा का गीत,
नाच रहे मोहन,
कुंज दें ताल।

प्रेम का रंग,
राधा और मोहन,
एक रंगे हैं।

कृष्ण रंग हैं,
गोरी  राधारानी जी,
श्याम हो गईं।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य