Wednesday, April 8, 2026

प्रेम में पुरुष...........'
स्त्री की छाती से चिपककर शिशु बन जाता है।

~और स्त्री.....'''
माँ की सतर्कता लिए हर विषम को 
अपने हृदय में अवशोषित करती है,
ताकि उसका पुरुष निर्भीक और सुरक्षित रहे। 
❤️🫀🤌

#शांडिल्य

Tuesday, April 7, 2026

-- ओये सुनो !!!!!!

प्रेम केवल हृदय की धड़कन नहीं,
यह चेतना की अदृश्य रसायन-क्रिया है,
जहाँ...."" तुम्हारे....'
झुमकों की झंकार मेरी स्मृतियों में प्रतिध्वनित होती है,
हर झूलन में कोई अधूरी कविता,
हर कंपन में कोई अनलिखा इतिहास..." 🧡❤️

#शांडिल्य

Sunday, April 5, 2026

"आज की तरह....."
मैं कल भी हमेशा तुम्हारा फ़ोटोग्राफ़र रहूँगा।
तुम्हारी हर मुस्कान, हर नज़र, हर ख्वाब,
मेरे भीतर की हर भावना में संजोकर रखूँगा।
हर जन्म, हर सृष्टि में, सिर्फ़ तुम्हारा साथ पाना~
मेरे मन का यह गहरा, अटूट वचन है" ♥️💛"

#शांडिल्य

Saturday, April 4, 2026

प्रेयसी कहती है—
मुझे सीता की तरह चाहो,
= "मैंने कहा—
तुम्हें राम की तरह खो भी सकता हूँ?
वो चुप रही..."
~क्योंकि ""
आधुनिक प्रेम में वियोग का साहस नहीं होता!"

❤️🧡

#शांडिल्य

Tuesday, March 31, 2026

जीवन का "अवसाद" कभी भी स्थायी नहीं,
हर 'संघर्ष' में छिपा होता है 'अमूल्य' त्राण।
जो धैर्य से कष्टसाध्य पथ पर चल पड़ता है,
वही अप्रमेय विजय का स्वाद चखता है।

असफलता केवल एक क्षणिक परावर्तन है,
नहीं तो हर क्षण में संपूर्णता के बीज अंकुरित होते हैं।
आज का अस्थिरतम क्षण कल का 
अतुलनीय गौरव बन जाता है।

तो चलो,
अविचलित इच्छाशक्ति  के साथ उठो,
और उस अज्ञात शिखर को छू लो,
जहाँ केवल वही पहुँचते हैं,
जो अपने संकल्प  को अद्वितीय 
अग्नि में परिवर्तित कर देते हैं।

#शांडिल्य

Monday, March 30, 2026

छोटे कदमों की मासूमियत
बड़े कदमों की छाया में....
"हर रात की सैर भी
एक अनकही दास्तान बन जाती है।

प्यारी जैकेट में
वह नन्हींआत्मा " और
उसके साथ चल रहा..." वह कोई—
जैसे जीवन की सुरक्षा और प्रेम
हमेशा साथ-साथ चलते हों , 
शायद यही है जीवन का सच्चा गीत। 
💛🌼♥️

#शांडिल्य

Saturday, March 28, 2026

"ए सुनो.....
तुम्हारी मुस्कान—
एक दैवीय संगीत बनकर
मेरे शब्दों की तहों में उतरती है।

तुम्हारी हर बात,
जैसे अदृश्य मृगमरीचिका,
मन के गहरे कुंड में सिहरन जगाती है।

और मैं........
असमंजस और सम्मोहित,
सिर्फ तुम्हारे होने का अनुग्रह गिनता हूँ।

शब्द यहाँ विफल हैं—
पर तुम्हारे नयनों की गूँज,
मेरे चेतन में अनन्त काव्य बनकर
धड़कती रहती है। 

#शांडिल्य