Friday, May 31, 2024

तुम से सजी है ये महफ़िल हमारी
प्रेम है ये तुम्हारी तड़प है ये हमारी

तुम तो व्यस्त हो दुनियां के रंग में
तुम्हारी मोहब्बत नज़्म है ये हमारी

अब मुलाकाते तो हो गई है पुरानी
चांद तारों के संग रात कटी ये हमारी

नहीं कोई शिकवा न शिकायत है तुम से
अब यादें तुम्हारी शोहरत है ये हमारी

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Monday, May 27, 2024

यूँ ही चला चल, रुकना नहीं है
गिरना और संभाला है खुद से
किसी से आशा न करना कहीं पे
उम्मीद में दिल टूटता बहुत है
गिरता और फिसलता बहुत है

यूँ ही चला चल नदियों के जैसा
रुकना नहीं है पर्वतों के डर से
आंधियों में राह खुद से तलासों
सागर से मिलने में चुनौतियां बहुत है

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, May 21, 2024

प्रेरणा हो तुम प्रिये, मैं गीत लिखता जा रहा हूं।
साथ मेरी चल पड़ी हो चाहे दुष्कर हो डगर

ढ़ाल बनकर तुम खड़ी हो आएं कितने बवंडर
तुम मेरी पतवार हो मैं नाव खेता जा रहा हूं।

प्रेरणा हो तुम प्रिये मैं गीत लिखता जा रहा हूं।
तुम मेरे जीवन में मधुर मुस्कान बन कर आ गई हो

मैं बेसुरा राग था तुम तान बन कर आ गई हो, 
तुम मेरी हो बांसुरी मैं संगीत बनता जा रहा हूं।

प्रेरणा हो तुम प्रिये मैं गीत बनता जा रहा हूं।
बस गई हो तुम प्रिये तन- मन में मेरे इस तरह

झूमकर मिलती है लहरें सागर में आकर जिस तरह
तुम मेरी हो प्रियतमा मैं मनमीत बनता जा रहा हूं,

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Saturday, May 18, 2024

बीते हुए लम्हों की कसक अब तलक प्राणों में है।
उन हालात की ख़ुशबू मेरी सांसो मे है 

धड़कनों की रागिनी में एक लम्हा बज उठा।
एक लम्हा आज तक बातों मे है ख़यालातों मे है।

जो गुज़र जाताहै लम्हा  लौट कर आता नहीं.।
इसलिये इक इक पल का संचय किया यादों मे है।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, May 14, 2024

बार बार संवारता हूं,बारबार बिखर जाती है
ये ज़िन्दगी है,हाथ आती ही नहीं है

इससे कोई क्या रखे उम्मीद
करीब दिखती है मगर,बेवफाई कर जाती है

उम्रभर ढ़ूंढ़ता रहा इसका पता
निगोड़ी साथ रहके भी नज़र नहीं आती है

कभी मिले तो कहना #शांडिल्य याद करता है
ये वो शै है,जो मिलती है तो,जान ले जाती है

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Saturday, May 11, 2024

ये झूठ है कि ज़िन्दगी से कुछ गिला ही नही,
चाहने वाला कोई शख्स क्यू मिला ही नहीं।।

तमाम उम्र भटकता रहा सफर में ही.......,
मोड़ ही मोड़ मिले ठौर बस मिला ही नही।।

हर कोई खुशबू बनके महकता है गुलशन मे,
मैं ऐसा फूल रहा आज तक खिला ही नही।।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Thursday, May 9, 2024

उलझे हैं केश जैसे नागिनों का जाल कोई
तिरछी नज़र ये कटार लगने लगी।।

अधरों की लालिमा लजाये सूर्य का प्रताप
झुमके की आभा अनवार लगने लगी।।

दूधिया सा चाँद ढोये जैसे सुरमई साँझ
ओढ़नी भी तन को कहार लगने लगी।।

प्रीत की पड़ी फुहार चढ़ने लगा ख़ुमार,
प्रियतमा भी रति-अवतार लगने लगी।।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, May 7, 2024

थक  गये  हम  राही  तेरे  राह में,
खो दिया  सुख चैन तेरी  चाह में।

भूलकर भी हम भूल सकते नहीं,
बखश दो हमें दो कदम पनाह में।

मुश्किल बहुत रहना उनके बिना,
कर दो रहम रख लो हमें छाँव में।

आ गई वो घड़ी कह दूँ मनसीरत,
बाँध लो दायरे में अपनी बाँह में।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Sunday, May 5, 2024

हरिक हाल दिल का बताती हैं आँखें
दिलों को दिलों से मिलाती हैं आँखें

जो कल तक गुज़रती थीं नज़रें बचा कर
वो छुप छुप के हमसे लड़ाती हैं आँखें

ज़रा मुस्कुरा कर जो देखा पलट कर
अजब दिल में हलचल मचाती हैं आँखें

समझदारी चलती नहीं इनके आगे
उतर कर ये दिल में नचाती हैं आँखें

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Thursday, May 2, 2024

अक्षरों से कुछ सीखें कैसे निभाते हैं साथ
पाकर नजदीकियां समझाते हैं अपनी बात।

अक्षर टूटकर शब्दों से जब रूठने लगते हैं
भाव अधूरे रह जाते उलझ जाते जज़्बात।

दिल से निकले शब्द नया इतिहास रचते हैं
यही शब्द मरहम बनते कहीं करते आघात।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य