Monday, February 24, 2025

रूठ जाये एक जो इक पास होना चाहिए
हरघड़ी जीवनमें कोई आस होना चाहिए

प्यार भी होता मुक़म्मल एक तरफा कब यहाँ
इश्क़ का दोनों तरफ एहसास होना चाहिए

देखते ही ठहर जाए चंचला सी ये नज़र
भीड़ में कोई तो चेहरा ख़ास होना चाहिए

हर तरफ है रोशनी त्योहार के दिन आ गए
मन के कोने कोने तक प्रकाश होना चाहिए

#शांडिल्य

Saturday, February 22, 2025

क्या लिखू 

तूँ तों बस मेरी रूह का खूबसूरत एक राज है
जिसे सब से छुपा के तुम्हें अपनी धड़कनो में बसाया है

मेरे दिल की बेचैनियो का सुकून हों तुम
मेरे ख़्यालों की मेरी साँसों की तूँ वो मेरी साज है

चुपके_से मिलने आती हों तुम सपनो में मेरे
जब सुबह उठ कर ढूंढता हूँ फिर निशान तेरे

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, February 18, 2025

मन प्रफ़ुल्लित जब हुआ 
तब प्रकट कविता हुई, 
शब्द का मोती चुना जब 
काव्य तब सविता हुई, 

लेखनी मे बंध गयी जब 
बन गयी वो हार जैसा, 
प्रेम का धागा पिरोया,
बन गयी वो यार जैसा,
 
प्यास सुनने की हुआ जब,
काव्य तब सरिता हुई, 
मन प्रफ़ुल्लित जब हुआ,
तब प्रकट कविता हुई।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Sunday, February 16, 2025

तुमसे मिलने को दिल ये मचलता रहा
याद में दिल तुम्हारी ही जलता रहा।

कट रही रात तेरी ज़ुदाई में ये
मेरी आंखों से सावन बरसता रहा।

किस कदर संगदिल आपका हो गया
मोम जैसा मेरा दिल पिघलता रहा ।

चांदनी रात दिल को जलाती रही
मेरी हालत पे  ये चांद हंसता रहा।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Friday, February 14, 2025

तेरी याद में ज़रा आँखें भिगो लूँ
उदास रात की तन्हाई में सो लूँ

अकेले ग़म का बोझ अब संभलता नहीं
अगर तू मिल जाये तो तुझसे लिपट कर रो लूँ

आंसुओं की बूँदें हैं या आँखों की नमी है
न ऊपर आसमां है न नीचे ज़मी है

यह कैसा मोड़ है ज़िन्दगी का
उसी की ज़रूरत है और उसी की कमी है

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

Monday, February 10, 2025

प्रिय। 
सुखद संसार हो तुम और पहला प्यार हो तुम। 
गीत में जो बह रहे हो भावना की धार हो तुम।।

जब पुकारू मैं तुम्हें तो तुम ह्रदय के पास आना
मौन को जो सुन सके प्रिय वो मधुर एहसास लाना

हो अलौकिक नेह की निधि जिन्दगी का सार हो तुम।
गीत में जो बह रहे हो भावना की धार हो तुम।।

~~~~ सुनील #शांडिल्य

Friday, February 7, 2025

प्रिय !!! लिखकर नीचे लिख दूँ नाम तुम्हारा
कुछ जगह बीच मे छोड़ नीचे लिख दूँ सदा तुम्हारा

लिखा बीच मे क्या? ये तुमको पढ़ना है
कागज़ पर मन की भाषा का अर्थ समझना है

जो भी अर्थ निकालोगे तुम वो मुझको स्वीकार
नैन झुके,मौन अधर, कोरा कागज़ अर्थ सभी का प्यार!!

~~~~ सुनिल #शांडिल्य