Monday, October 12, 2026
छुप छुप के चांद देखता हूं
छुप-छुप के चाँद देखता था,
तेरी यादों में रातें काटता था।
चाँद से करता था बातें तेरी,
हर सितारे में तुझे तलाशता था।
तू मिलेगी कभी ख़्वाबों में शायद,
इसी उम्मीद में दिल धड़कता था। ✍️
#शांडिल्य
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