Sunday, October 11, 2026

बारिश की बूंदे

ज़मीं की प्यास को छूकर नई पहचान देती हैं,
हवा के संग मिलकर हर कली को जान देती हैं।

​उतरती हैं जब छत पे तो कोई साज़ बजता है,
पुरानी याद को फिर इक नया उनवान देती हैं।

​हथेली पर ठहर कर जो कभी चुपचाप हँसती हैं,
वो बूँदें ख़्वाब की मानिंद इक मुस्कान देती हैं।

#शांडिल्य

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