Wednesday, October 21, 2026
एतबार
किस पर करें अब दिल से एतबार,
हर चेहरा लगता है पहरेदार।
कुछ ज़ख़्म मिले अपनों से ऐसे,
दिल ढूँढ़ता रहा फिर भी प्यार।
लब ख़ामोश थे, आँखें नम थीं,
करता रहा दिल तेरा इंतज़ार।
टूटे हुए ख़्वाबों ने सिखाया,
हर शख़्स नहीं होता वफ़ादार।
— शांडिल्य
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