Monday, November 2, 2026

लगाव

कुछ ऐसा है तुमसे दिल का लगाव, 
जैसे चाँद से हो रातों का जुड़ाव।

न कहने की ज़रूरत, न कोई सवाल, 
ख़ामोशियों में भी रहता है भाव।

दूर रहकर भी करीब लगते हो तुम, 
ये कैसा रिश्ता, ये कैसा प्रभाव।

वक़्त बदलता रहा, मौसम भी बदले, 
मगर कम न हुआ दिल का लगाव।

कुछ रिश्ते नाम के मोहताज नहीं, 
बस महसूस होता है उनका ठहराव।

#शांडिल्य 

No comments:

Post a Comment