Sunday, September 28, 2025

सुनो,
आखिर क्यों तुम्हे देख कर
सिर झुक जाता है मेरा,
क्या तुम हो
जिसकी मैं इबादत करने लग जाता हूँ,
तुम्हे देख कर मैं क्यो तू हो जाता हूँ
ऐसा लगता है जैसे
तुम्हारे जिस्म में मैं रूह हो जाता हूँ,
जानते हो ना तुम
तुम्हे देख कर मैं
पागल ही हो जाता हूँ,,,,

#शांडिल्य

Friday, September 26, 2025

कहां फिर मेरे लफ्जो मे आवाज रहती हैं
तुझे ना सोचू तो तबियत इनकी भी नासाज रहती हैं

इल्तजा है शिकवा है शिकायत जिंदगी से
सिर्फ मेरी है वो तो क्यू मुझसे नाराज रहती हैं

जर्रा जर्रा वाकिफ है यू तो मेरी मोहब्बत से 
ना जाने क्यों बेपरवाह मेरी हमराज रहती हैं

#शांडिल्य 

Tuesday, September 23, 2025

कुछ रिश्ते,कुछ लम्हें और कुछ लोग
इनसे हम जितना ज्यादा जुड़े रहते हैं
खोने के बाद उनके लिए उतना ही तड़पते हैं
सोचते हैं शायद जी नहीं पाएंगे उनके बिन
गुजरेंगे नहीं रात दिन कभी भी उनके बिन
मगर फिर भी जी लेते हैं उनके बिन
लेकिन पल- पल उनकी याद में मरते हैं हर दिन

#शांडिल्य

Monday, September 22, 2025

ख़्वाब टूटे कुछ यू जैसे हरे पत्ते टूटे हों साखों से
और देखते देखते हार गया समंदर इन आँखों से

तुम्हें कुछ सुनना नहीं था इसीलिए मैंने कहा नहीं
क्यूँकि मुझे तुमसे कुछ कहना था ना की लाखों से

पूर्णमासी ने जब मन बना ही लिया अमावस्या का
फिर शिकायत क्या और क्यूँ करें अँधेरी पाखों से

#शांडिल्य

Friday, September 19, 2025

जन्मांतरो के लिए मुझे
धारण करने दो तुम्हारा रंग

इसमे ही समाया मुक्ति
का वास्तविक मंत्र 

जप , तप , ध्यान
इसी मे अवशिष्ट है ,

प्रेम बिन तो जीव
प्राण तत्व विहीन है 

तुम्हारे प्रेम के बिन तो
मुझे संसार भी स्वीकार्य नहीं 

#शांडिल्य

Thursday, September 18, 2025

आएंगें गुजरे लम्हें याद, ये वक़्त गुजरने दो,
नम होंगे दिले-ज़ज्बात,गिरकर संभलने दो।

शायद उन्हें तलाश थी, किसी और राह की,
छोड़ों अब उन्हें, उसी राह पर ही चलने दो।

मोड़ मुड़ते रहे सफर में,क़दम-क़दम पर वो,
पीछे छूटे हर मोड़ से,उन्हें खुद ही लड़ने दो।

#शांडिल्य

Wednesday, September 17, 2025

संभलना था हमें,,
साथ फिसलते चले गए,,
ना चाहा फिर भी,,
उसकी चाहत में संवरते चले गए,,
अंज़ाम मालूम था,,
फिर भी आगे बढ़ते चले गए,,
तिनका तिनका जोड़ा था ख़ुद को,,
दूरियों में बिखरते चले गए,,
अब तकलीफ़ ये नहीं कि दूर हैं,,
पास रह कर भी बिछड़ते चले गए,,

#शांडिल्य