Monday, February 2, 2026

ए सुनो…

सातवें फेरे का वह क्षण—
जहाँ समय भी धीरे-धीरे सांस लेता है,
हवा में सिर्फ़ तुम्हारी खुशबू है,
और मेरी धड़कन में सिर्फ़ तुम्हारे नाम की आहट।
साड़ी की लहर में झिल मिलाता चाँद,
माथे की बिंदी में बसता सवेरा,
मांग का कुमकुम हमारे वादों का लालिमा युक्त साक्षी... 
और हाथों की गरमी “दो आत्माओं का अनंत मिलन”।
अब हम केवल दो नहीं,हम एक हैं
एक ऐसी धुन में बँधे हुए,
जिसे समय ही नहीं, सिर्फ़ प्रेम ही समझ सकता है।

#शांडिल्य

Sunday, February 1, 2026

मुझे फ़क़त "समझदार" कहकर फिर समझाया जाएगा,
मुझे विदित है मेरे 'भाग्य-पत्र' में फिर से "समझौता" आएगा।। 

#शांडिल्य

Thursday, January 29, 2026

बारिश की बूंदें याद कर रही तुझे
तेरे एहसासों की याद दिला रही मुझे

बेबस निगाहें याद कर रही तुझे
सुनी बांहे मेरी याद कर रही तुझे

दर्द है गम है जाने क्या क्या है मुझमें
सबसे खास है तेरी कमी खल रही मुझे

अहसास का समंदर उमड़ा पड़ा है अंदर
तेरी पनाहों की जरूरत अब हो रही मुझे।

#शांडिल्य

Tuesday, January 20, 2026

पतझड़ आते ही रहते हैं..
की मधुबन फिर भी खिलते !!
फूलों की महक से भ्रमर ललचाए!

रेत के नीचे  जल की धारा!!
हर सागर का यहाँ किनारा!!
रातों के आँचल में.. छुपा है सूरज प्यारा !

मैं बन जाऊं  नज़र तुम्हारी..
दे दो मुझको  ज़िम्मेदारी!!
तुम मेरी आँखों से.. देखो दुनिया सारी!!

#शांडिल्य

Monday, January 19, 2026

जुबां मौन है पर नजर बोलती है,
दबे दिल के राज सहज खोलती है ।

कभी पास बैठो निहारो इन नजर को,
ए बिना शब्द के भी गजब बोलती है ।

निहारोगे जितना इन आंखो मे मेरी,
मुहब्बत मे उतना ए शहद घोलती है ।

शब्दो को अधरों पर कभी तुम न लाना,
सुनना और कहना जो नजर बोलती है। 

#शांडिल्य

Saturday, January 17, 2026

कवि की प्रेयसी, स्वप्नों की मूरत,
कल्पनाओं में बसी, भावों की सूरत।

शब्दों की गहराई, मंद मौन मुस्कान,
धड़कनों में बसी, अनजानी पहचान।

कभी चांदनी में, कभी घटाओं में,
बसती है वह मन की गहराइयों में।

अनकही बातों का सजीव चित्रण,
उसके बिना अधूरा कवि का सृजन।

#शांडिल्य

Saturday, January 10, 2026

मुझसे तुम्हारी ताल्लुकात पुराना है 
मुलाकातों का सिलसिला याराना है .!! 

दरमियान न कोई रिश्ता छुपाया है 
खुली किताब की तरह सामने रखा है .!! 

उस सोच से परे जिस सोच में दुनियां है 
दरमियान आंखो में कहानी एक अफसाना है .!! 

#शांडिल्य

Tuesday, January 6, 2026

मैं लिखता हूँ कि मुझे लिखना नहीं था,  
शब्द मेरी नसों में अंधकार की धाराएँ बन गए।  
मैं जीता हूँ कि मुझे जीना नहीं था,  
हर साँस मुझे शून्य की ओर धकेलती रही।  

मैं मरता हूँ कि मुझे मरना नहीं था,  
मृत्यु भी मेरी प्रतीक्षा में थक गई।  
मैं थक गया था खुद से हार कर,  
हार ने मुझे अपनी ही परछाई बना लिया।  

मैं जो हूँ,वो मेरी चाह का प्रतिबिंब नहीं,  
मैं जो बन गया,वो मेरी भूल का परिणाम नहीं।  
मैं बस एक शून्य हूँ,
जिसमें सवाल और जवाब दोनों ही डूब चुके हैं।  

#शांडिल्य

Saturday, January 3, 2026

जीवन संसार सागर में
प्रेम व दोस्ती की जलतरंग है। 
दोनों से जीवन में खुशहाली 
नहीं तो फीका बदरंग है। 
प्रेम में है आकर्षण
तो समर्पण दोस्ती का भाव है। 
प्रेम हिलोरती लहरें तो 
दोस्ती का साहिल स्वभाव है। 
प्रेम और दोस्ती में
भेद जरा मुश्किल है। 
प्रेम ढूंढता तन्हाई 
तो दोस्ती सजाती महफ़िल है। 

#शांडिल्य

Thursday, January 1, 2026

ख़ामोशी के इस समंदर में,
लफ़्ज़ भी अक्सर डूब जाते हैं।
दर्द की धूप में तपकर ही तो,
हौसलों के साये खिल जाते हैं।

हमने भी सीखा है अब
इन ज़ख़्मों को सलीके से छुपाना…
दिल के भीतर जलती लौ को
मुस्कानों से जगमगाना।

जो मिला नहीं फिर भी अपना लगे,
वो इश्क़ भी क्या अजीब कहानी—
बस ख़्यालों की महफ़िल में ही सही,
दिल की राहों में बसता है वो रूहानी।

#शांडिल्य