Tuesday, July 28, 2026

डायरी में आज फिर कुछ ख़्वाब लिखता हूँ,
अपने दिल के हर धड़कते बाब लिखता हूँ।

जो किसी से कह न पाया उम्र भर खुलकर,
उन सभी जज़्बात का हिसाब लिखता हूँ।

कुछ हँसी के फूल हैं, कुछ दर्द की बारिश,
हर सफ़े पर ज़िंदगी की किताब लिखता हूँ।

जब भी तन्हाई मुझे चुपचाप छू जाती,
मैं उसी पल अपना पूरा हाल लिखता हूँ।

#शांडिल्य

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