Saturday, October 24, 2026

चिट्ठियों में आज भी एहसास रहते हैं, 
सूखे हुए गुलाबों में कुछ ख़्वाब रहते हैं। 
लफ़्ज़ों में ढूँढ़ लेना कभी धड़कनों की आहट, 
ख़ामोश पन्नों में भी जवाब रहते हैं।

#शांडिल्य

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