Thursday, April 17, 2025

खिली सी रंगत पर,हजारों रंगीन अफ़साने लिखे 
बेगैरत सादगी आ कर क्यों,मौसम बिगाड़ देती है ??

खिली हो धूप-छांव में,तमस में चांदनी का जलवा
खामोशी छेड़ती है राग,नीरव में गजल का मसला

अनजान सी रागिनी आकर,तरन्नुम बिगाड़ देती है
बेगैरत सादगी आ कर क्यों,मौसम बिगाड़ देती है

#शांडिल्य

Saturday, April 5, 2025

कोई ख्वाब जैसे 
पलकों को छूकर जाए
कोई राही जैसे 
अपनी मंजिल से लौट जाए
कोई दरिया जैसे
समंदर में जाकर खो जाए
तुम और मैं ऐसे ही तो हैं
ओस की एक बूँद जैसे
हरे पत्तों की गोद में छुप जाए
कोई किरण जैसे
दूब से लिपटकर चटकीली हो जाए
कोयल की कूक जैसे
तुम और मैं ऐसे ही तो हैं

#शांडिल्य

Saturday, March 29, 2025

जिस्म मिलता हैं ज़ब रूह से तुम्हारी
दिल में मेरे हल्का हल्का सा सरूर छाने लग़ जाता है

दिल धड़कने लगता है तुमसे से मिल जाने पर
हुस्न पर तुम्हारे प्यारा सा निखार आने लगता है

खोने लगते है ख़्वाबों की दुनियाँ में हम दोनों
सपनों में मिलने का खुमार सा छाने लगता है

जुल्फें संवरने लगती हैँ तुम्हारी प्यार बहकने लगता है
अँखियो में तुम्हारी मोहब्बत का काजल घुलने लग़ता है

#शांडिल्य

Thursday, March 20, 2025

कुछ पल के लिये, साथ रह लो मेरे,
कुछ कदम ही सही, साथ चल लो मेरे... 

उन कुछ पलों मे ही, मेरे मायने बदल जाऐंगे, 
तुम्हारे एक साथ से, मेरे पैमाने बदल जाऐगें...

तुम्हें मुझसे क्या मिलेगा, इसका ना मुझे पता है, 
मेरे साथ तुम रहोगे, यही मेरी पूर्णता है...

#शांडिल्य

Wednesday, March 12, 2025

तारों भरी विभावरी, पर दिखता ना चांद
बार बार मुझसे कहे, कुछ अंतर मन नाद

रात बात हो प्रेम की, कहती पवन पुकार
नींद ना आती जागता, किस विरही का प्यार

मधुरस भीनी रात हो, मधुर मीत के संग
छूकर पावन प्रीत से, कुशमित करता अंग

#शांडिल्य

Thursday, March 6, 2025

सौंदर्य, सुगंधित,अप्रतिम तुम,
लावण्य,रूप का,संगम तुम,

कुंतल,केश,चपल नयना तुम,
साँवली,सलोनी,सबला तुम,

रूप,माधुर्य का,मेल हो तुम,
तीखे,नयनों का,जाल हो तुम,

भीगे होठों के,जाम हो तुम,
सरल,सरस,स्निग्धा,हो तुम,

प्रेम, त्याग की मूरत हो तुम,
लय और ताल की सरगम  हो तुम,

~~~~ #शांडिल्य

Sunday, March 2, 2025

कोई जैसे मुझे पुकार रहा है,दिल में हलचल है
चोर नजरों से निहार रहा है, दिल मे हलचल है

बादल शबाब पर हैं,घटाओं का रंग गहरा रहा है
वो जुल्फों को संवार रहा है, दिल मे हलचल है

कोई मीठी सी धुन आ रही है,छनछन,छनछन
जैसे पायल को उतार रहा है, दिल मे हलचल है

#शांडिल्य