Saturday, June 28, 2025

तेरी कंचन कंचन काया सिन्दुरी 
तेरी चंचल_चंचल छाया सिन्दुरी 
रात भले कितनी भी चांदी बरसी हो 
सुबह सुबह मन को बस भाया सिन्दुरी 
तेरे अक्स से जल हो आया सिन्दुरी 
माथे की बिन्दी मै लाया सिन्दुरी 
ओंठ भले हो तेरे सुर्ख मलाई से 
श्याम वर्ण पर ठप्पा आया सिन्दुरी 
श्वेत हंस सुबह उड़ हो आया सिन्दुरी 
हरी घांस शबनम जम आया सिन्दुरी 
कलियां तेरी आँखो जैसी गुलाबी हैं 
हिम खण्डों पे स्वर्ण पताका सिन्दुरी 
मंदिर से जैसे दिया हूँ लाया सिन्दुरी 
तूने घर को भोर सजाया सिन्दुरी 
जाने ख्वाब य़ा सच मे कोई हकिकत है 
जब दिल जला धुआं बस आया सिन्दुरी

#शांडिल्य

Wednesday, June 25, 2025

पुरुष में प्रेम अनंत ब्रह्माण्ड जितना होता है, 
जबकि मौन होता है सागर की तरह, 
भाव से भरा वह भी चाहता है 
बालक सा चंचल होना, 
नदियों की तरह बहना
पर .....ये संसार पुरुष को ऐसा देखने की आदी नहीं, 
अंततः वह इन सब को दबाए रख कठोर 
होने का दिखावा करता है...!!

#शांडिल्य

Tuesday, June 24, 2025

तेरे भीगे बदन की खुशबु से
लहरें भी हुयी मस्तानी सी

तेरी ज़ुल्फ़ को छू कर आज हुई
खामोश हवा दीवानी सी

यह रूप का कुंदन देखा हुआ
यह जिस्म का चन्दन महका हुआ

बिखरा हुवा काजल आँखों में
तूफान की हलचल साँसों में

ये नरम लबो की ख़ामोशी
पलकों में छुपी हैरानी सी

#शांडिल्य

Saturday, June 21, 2025

मिलने के लिए मुलाक़ात-ज़रूरी तो नहीं।       
भीगने के लिए बरसात-ज़रूरी तो नहीं ।।

रौशन तेरे ख़यालों से है  दुनिया मेरी, 
रोशनी के लिए चाँदनी रात-ज़रूरी तो नही।

रूह से रूह का रिश्ता है - टूटेगा नही, 
अब हर रिश्ते में बारात -ज़रूरी तो नही ।

#शांडिल्य

Tuesday, June 17, 2025

उलझ गया है वो फिर से उन्ही सवालों में 
और जवाब बंद हैं सारे ही उनके तालों में ।

दर्द बांटे तो तुम्हें प्यार भी मिल जायेगा 
भीड़ आज बड़ रही है बस शिवालों में ।

छटेंगी धुंध लो दिनकर भी निकल आए हैं 
ढूँढ  ही लेंगे तुम्हें हम आज घने जालों में।

#शांडिल्य

Tuesday, June 10, 2025

वादियों में ठंडे कोहरे की तरह, ज़हन में उतरता है कोई
वसंत के फूलों की तरह, मन में महकता है कोई,

धुंध बन रही फिर किसी हसीं मुलाकात का ताना बाना
कड़ाके की ठंड सा बदन में उतरता है कोई

इश्क की मस्ती सा रूह में ढलता है कोई
साथ महबूबा का पाकर बिन पिए बहकता है कोई

#शांडिल्य

Wednesday, June 4, 2025

प्रेम चाहने वाली स्त्री 
सारी शिकायतें करके, 
उन्हें अपने जूड़े में बाँध देती हैं

और छोड़ती हैं  दो लटें - 
 प्रेम और आलिंगन की 

वो चाहती है आप उँगलियों से सँवारें 
उनकी यह दो लटें और सारे गिले-शिकवे  
गजरे में फँसा कर दूर कर दें।

#शांडिल्य

Monday, June 2, 2025

मौन अधर,क्या लिखूँ पीर जो मंत्रहीन
निर्मोही प्रियतम,चलत यायावरी हीन

शब्द विहीन,संज्ञा हीन,है स्व में लीन
शोरगुल से दूर,बेचैन मन है गतिहीन

दामिनी तीर,निर्झरिणी नीर,तरंग हीन
अशांत चित्त,किस निमित अंतरहीन

दरस दो मेरे हमजोली,बन संकोचहीन
प्रतीक्षारत मौन अधर,हो जाओ लीन

#शांडिल्य