तेरी कंचन कंचन काया सिन्दुरी
तेरी चंचल_चंचल छाया सिन्दुरी
रात भले कितनी भी चांदी बरसी हो
सुबह सुबह मन को बस भाया सिन्दुरी
तेरे अक्स से जल हो आया सिन्दुरी
माथे की बिन्दी मै लाया सिन्दुरी
ओंठ भले हो तेरे सुर्ख मलाई से
श्याम वर्ण पर ठप्पा आया सिन्दुरी
श्वेत हंस सुबह उड़ हो आया सिन्दुरी
हरी घांस शबनम जम आया सिन्दुरी
कलियां तेरी आँखो जैसी गुलाबी हैं
हिम खण्डों पे स्वर्ण पताका सिन्दुरी
मंदिर से जैसे दिया हूँ लाया सिन्दुरी
तूने घर को भोर सजाया सिन्दुरी
जाने ख्वाब य़ा सच मे कोई हकिकत है
जब दिल जला धुआं बस आया सिन्दुरी
#शांडिल्य