Tuesday, June 10, 2025

वादियों में ठंडे कोहरे की तरह, ज़हन में उतरता है कोई
वसंत के फूलों की तरह, मन में महकता है कोई,

धुंध बन रही फिर किसी हसीं मुलाकात का ताना बाना
कड़ाके की ठंड सा बदन में उतरता है कोई

इश्क की मस्ती सा रूह में ढलता है कोई
साथ महबूबा का पाकर बिन पिए बहकता है कोई

#शांडिल्य

Wednesday, June 4, 2025

प्रेम चाहने वाली स्त्री 
सारी शिकायतें करके, 
उन्हें अपने जूड़े में बाँध देती हैं

और छोड़ती हैं  दो लटें - 
 प्रेम और आलिंगन की 

वो चाहती है आप उँगलियों से सँवारें 
उनकी यह दो लटें और सारे गिले-शिकवे  
गजरे में फँसा कर दूर कर दें।

#शांडिल्य

Monday, June 2, 2025

मौन अधर,क्या लिखूँ पीर जो मंत्रहीन
निर्मोही प्रियतम,चलत यायावरी हीन

शब्द विहीन,संज्ञा हीन,है स्व में लीन
शोरगुल से दूर,बेचैन मन है गतिहीन

दामिनी तीर,निर्झरिणी नीर,तरंग हीन
अशांत चित्त,किस निमित अंतरहीन

दरस दो मेरे हमजोली,बन संकोचहीन
प्रतीक्षारत मौन अधर,हो जाओ लीन

#शांडिल्य

Friday, May 30, 2025

मखमली कोहरा गुलाबी चेहरा
प्यासी निगाहों पे सर्दसा पैहरा

गुनगुनी धूपसी मीठी यादें
दिलमें इक हूल उठायें गहरा

शाख पे शबनम लिपट युँ जाती है
ज्यूँ पुरवइया पहाड़ों पे गाती है

पायलकी झंकार दे पुकारले अबतो
कुछ हसीं लम्हे उधार दे अबतो

सब वादे चल असल करलें 
चल पहाड़ों को अपना घर करले

#शांडिल्य

Thursday, May 29, 2025

आत्मिक प्रेम है तुमसे मानसिक प्रेम है तुमसे,
देह पूर्णतः गौण है इसमें स्वार्थ भी मौन है इसमें !!

दैहिक स्पर्श से अधिक मानसिक स्पर्श है तुमसे,
समक्ष उपस्थित नहीं हो स्मरण संवाद है तुमसे!!

आर्कषण नहीं तुमसे आत्मा के नव कोपल हो,
मन की मरुभूमि में स्थित दुर्लभ श्वेत कमल हो!

#शांडिल्य

Tuesday, May 27, 2025

हसीन ख्वाबों सी मुकम्मल 
हकिकत तू मेरे जिंदगी की

मुलाकात भले ही मुमकिन नहीं
मगर जुड़े हुए हैं दिल से दिल ए हमनशीं

यादों पर पहरे तेरे अक्स के सभी
ओर जहन में तेरा नूर आफरिन

मुलाकातें तुम से ख्वाबों में रोज की
ओर नींद से दुश्मनी हमारे हर सुबह की

#शांडिल्य

Sunday, May 25, 2025

खास नही कुछ भी यहा
सब छूट जाना ही है यहा
फिर काहे सोचे इतना यहा
रह जाना है जब सब यहा

सोच-सोच क्यो कुंठाये यहा
प्रकृति का सिर्फ सब है यहा
मूल प्रकृति अपनी जाने यहा
यही उद्देश्य जीवन का है यहा

#शांडिल्य