Tuesday, November 11, 2025

सरस सृजन की संगिनी हो प्रीत का प्रसार तुम 
अनुरक्त हृदय की रागिनी हो स्वप्न का सँसार तुम 

कुमुद कोमल कामिनी हो प्रणय की पुकार तुम 
मुक्त मुग्ध मंदाकिनी हो मन्मथ की मनुहार तुम 

चपल चँचल चाँदनी हो वैभव का विस्तार तुम
सदा शुभ्र सुहासिनी हो अनंग का अवतार तुम 

#शांडिल्य

Monday, November 10, 2025

जब चाहे देख लो 
तुम्हारी याद में आँखों से
अश्क नहीं बहते है बस आत्मा की पिघलती है...

लिखना चाहता हूँं
तुम पर और अपने इश्क पर एक किताब...

पर कुछ ऐसे डूबे हैं
तुम्हारे खयालों में
कि एक लफ्ज भी  नहीं  लिख पाते...

#शांडिल्य 

Sunday, November 9, 2025

अगन में मगन हो के मन सो गया 
हमने सोचा था कुछ, और कुछ हो गया

सुंदर सौम्य सघन घन में मंजुल मृदुल मुखर मन में 
मादक मदिरा मुस्काती प्रीत चपल चंदन वन में 

त्रस्त ताप तपते तन में तर्से तृप्ति तड़ित त्रण में 
निष्ठुर सांसों के व्यतिक्रम कर्म दोष ज्यों जीवन  में

#शांडिल्य

Thursday, November 6, 2025

जीवन के कुछ अनमोल पल पन्नों के अंदर थे बंद
लिखे हुए तुम्हारे वह छंद लगे मुझे जैसे मकरंद

पोर-पोर झंकृत किया उस बिसरी हुई बात ने
मन मेरा अलंकृत किया स्मृतियों के मलय बहार ने

उन दिनों को ढूंढता हूं मै हरदम ख्वाबों खयालों में
सागर सा था शांत मैं और निर्झर सी चंचल तुम

लिखने बैठूं तेरे बारे में शब्द कम पड़ जाते हैं
कुछ समझ नहीं आता क्यों अधर मौन हो जाते हैं।

बांधे रखा है मुझे तुमसे उन स्मृतियों के भंवर जाल ने
सुवासित मुझको कर दिया स्मृतियों के मलय बयार ने।

#शांडिल्य

Wednesday, November 5, 2025

नशीली आँखों से
तुम मुझे देखती हो
आँखों से मुझे तुम
अपना बना लेती हो
दुनिया को भुला कर तुम
आग़ोश में मुझे छुपा लेती हो
ये कैसी उलझन हुई
जो सुलझती नहीं मुझसे
उलझता हूँ तुमसे
फिर भी उलझता नहीं
साँसे तेज हुई जा रही
और धड़कन करती शोर
थाम ले मुझे अब तू
मुझ पे कहां मेरा जोर

#शांडिल्य

Monday, November 3, 2025

मीत मेरे ! 
तुम्हारे व्यक्तित्व की सादगी ने
हर पल मुझे आकर्षित किया।
तुम्हारे आचरण की सभ्यता ने
हर क्षण मुझे प्रभावित किया।
तुम्हारी निश्छलता ने प्रतिक्षण
अंतर्मन को मुग्ध किया।
तुम्हारी पावनता ने प्रतिपल
आत्मा का स्पर्श किया .!!
तुमसे एक अप्रतिम,अटूट 
बंधन में बंध गया हूं।
तुमसे मेरा ये पवित्र बंधन
आजीवन सिर्फ़ मेरा है।
तुम्हारे बिना मैं स्वयं की
कल्पना भी ना कर पाऊंगा।
तुमसे विलग होकर अब
कहां जी पाऊंगा ..!!

#शांडिल्य

Sunday, November 2, 2025

न जाने क्या बात है तुम्हारे हर अंदाज में
अजीब सी कशिश है तुम्हारे इस शबाब में

तेरी #सांसों की हरारत से पिघल जाऊं न कहीं 
तुम समा गये हो मेरी हर #धड़कन हर #सांस में 

तेरे दीदार की तलब लाजिमी है ऐ मेरे सनम
तेरी #धड़कन भी हुई शामिल मेरी आवाज में..