Saturday, May 24, 2025

तू ही सुकून,तू ही आदत है मेरी,
तुझसे मेरी हर ख़ुशी,तू ही राहत  है मेरी.!

जिसे कभी खो न सकूँ...
तू वो चाहत है मेरी...!

अब न कोई ख़्वाहिश बची है.
तू दुआ में मिली सबसे बड़ी इबादत है मेंरी.!

#शांडिल्य

Friday, May 23, 2025

रात अब गहरी हो चली पलकें भारी है,
आंखों पर मगर ख्वाबों की पहरेदारी है..

मंजिल के दीदार में अभी वक्त लगेगा,
उसी वक्त के इंतजार में सफ़र जारी है

हालात हक में हों या खड़े हों मुकाबिल 
हर जंग में फतह करना मेरी जिम्मेदारी है

#शांडिल्य

Thursday, May 22, 2025

एक चांद है आसमान में
दूसरा बाहों में मेरी..

एक घटा भादो के बादल
दूसरा जुल्फों में तेरी..

एक भूलभुलैया आँखो में मेरी
दूसरा आंखों में तेरी..

एक नशा गालिब की ग़ज़लें
दूसरा बातों में तेरी.....!!!!

#शांडिल्य

Tuesday, May 20, 2025

मेरे तुम्हारे दरमियां 
कैसे कहूँ कोई रिश्ता नहीं, 
जब भी लिखता हूँ, 
कलम से बयां तुम हो जाती हो,
रूह से महसूस होती हो मुझे, 
हर वक्त हर लम्हे में, 
कैसे कहूँ तुम्हे, 
तुम मेरी कुछ भी नहीं... ....??💞

#शांडिल्य

Saturday, May 17, 2025

नज़ाकत भरी है अदा आपकी,
हिफ़ाज़त करे अब ख़ुदाआपकी।

पिए बिन नशा हो रहाआज तो,
निगाहें बनी मयकदा आपकी।

हज़ारों नज़र ख़ूबसूरत मगर,
अदाएँ सभी से जुदा आपकी।

भुलाना नहीं ज़िंदगी में कभी,
हमें चाहिए बस रज़ा आपकी।

#शांडिल्य

Thursday, April 17, 2025

खिली सी रंगत पर,हजारों रंगीन अफ़साने लिखे 
बेगैरत सादगी आ कर क्यों,मौसम बिगाड़ देती है ??

खिली हो धूप-छांव में,तमस में चांदनी का जलवा
खामोशी छेड़ती है राग,नीरव में गजल का मसला

अनजान सी रागिनी आकर,तरन्नुम बिगाड़ देती है
बेगैरत सादगी आ कर क्यों,मौसम बिगाड़ देती है

#शांडिल्य

Saturday, April 5, 2025

कोई ख्वाब जैसे 
पलकों को छूकर जाए
कोई राही जैसे 
अपनी मंजिल से लौट जाए
कोई दरिया जैसे
समंदर में जाकर खो जाए
तुम और मैं ऐसे ही तो हैं
ओस की एक बूँद जैसे
हरे पत्तों की गोद में छुप जाए
कोई किरण जैसे
दूब से लिपटकर चटकीली हो जाए
कोयल की कूक जैसे
तुम और मैं ऐसे ही तो हैं

#शांडिल्य