Saturday, August 30, 2025

कभी मधुर मुस्कान क्षणिक-सी
कभी होंठ पर कंपन होता 
जैसे गहरी निद्रा में शिशु 
हर क्षण अपना रूप बदलता

लाया है संदेश मिलन का 
दूर क्षितिज का धुंधला कोना 
दुल्हन सरीखी दिशा सिमटकर
छेड़ रही चाहों की वीणा

सीले आंगन में अंतर के 
धूप आज वर्षों में छाई 
प्रियतम मिलने को आते हैं 
सृष्टि इसी से है खिल आई 

#शांडिल्य

Friday, August 29, 2025

प्रियतम के दर्शन की आशा 
पीतवर्ण को करें गुलाबी 
जैसे सुरज की किरण सुनहरी
निकल खिला दें कमल गुलाबी

नैननकी अनकही वेदना
निर्झरबन‌ कपोल को चूमें
धारा का अल्हड़पन उरकी
सीमाओं को बढ़कर चूमें

अलसाई बोझिल पलकोंका 
दिल-थिर खुलना और झपकना 
अंबर से दो-दो तारों का 
टूट- टूट कर गिरना

#शांडिल्य

Thursday, August 28, 2025

देख कर तेरी वो चमकती आंखें, 
जैसे बिन कहे ही सब कुछ कह देती हैं। 

धीरे से तेरे होठों का हिलना,
बिन बोले ही सब कुछ कह जाना। 

तुम कुछ कहती नहीं हो, न मैं कुछ बोलता हूं
हां हम चुप रहते हैं, सिर्फ देखते हैं तुम्हे। 

मगर मेरा दिल दिल से बातें करता है
हजारों मील दूर रह कर गले मिलता है। 

#शांडिल्य

Tuesday, August 26, 2025

छोड़ो शिकायतें चलो आज कुछ लिखता हूं,
कुछ आधी अधूरी, सूरज सी चमकती
कुछ जागी सी, कुछ अलसाई सी,
सुबह की कलियों में लिपटी मेरे प्यार की बातें
वो मेरा धीरे से अपनी आंखों का खोलना
और सामने तेरा मुस्कुराता चेहरा नज़र आना
जैसे अभी चमका हो सूरज मेरे दिल के आंगन में

#शांडिल्य

Sunday, August 24, 2025

सूरज ऊपर टंग गया,जैसे नभ का भूप  
मुंडेरों पर चढ़ गई, रजत सरीखी धूप। 

पत्ती नर्तन कर रही रिस-रिस जाये ओस 
ठंडी-ठंडी हवा भी पंहुच गई कई कई कोस। 

नमी ओस की पड़ रही,धुल गई सारी धूल,
सदा नहाये से लगें, खिल-खिल करते फूल। 

#शांडिल्य

Saturday, August 23, 2025

देख कर तेरी वो चमकती आंखें,
जैसे बिन कहे ही सब कुछ कह देती हैं

धीरे से तेरे होठों का हिलना,
बिन बोले ही सब कुछ कह जाना,

तुम कुछ कहती नहीं हो, न मैं कुछ बोलता हूं
हां हम चुप रहते हैं, सिर्फ देखते हैं तुम्हे 

मगर मेरा दिल दिल से बातें करता है
हजारों मील दूर रह कर गले मिलता है

#शांडिल्य

Thursday, August 21, 2025

बिन कहे अल्फ़ाज़ जब अपना पता देने लगे
बिन लिखे खत खुद ब खुद अपना पता देने लगे

अनछुआ एहसास था वो अनबुझी ही प्यास भी
गीत धड़कन से निकल अपना पता देने लगे

कुछ न कह पाई जुबां पर आंख ने सब कुछ कहा
अनकहे थे लफ्ज पर अपना पता देने लगे

#शांडिल्य

Wednesday, August 20, 2025

'ओए 'सुन तेरे' बिन—  
ये जीवन एक अधूरा प्रश्न है,  
मानो ऋतु बिना मेघ,  या
मेले बिना रंगों की रश्मि।  
~"मेरी.....""""
हर धड़कन तेरा नाम जपती है, 
तेरी बाहों की शरण में ही  
मैंने सृष्टि का सुन्दरतम स्वप्न देखा...
सुनो—  
अगर कभी लौट सको तो  
मेरी आत्मा की प्यास बुझाने आ जाना,  
सिर्फ मेरे लिए...!!!

#शांडिल्य

Sunday, August 17, 2025

"रविवार की सुबह —"

बिस्तर अभी तक
तेरी नींद से महक रहा है,
धूप खिड़की से नहीं —
तेरी यादों से छनकर आई है।

किताब जो खुली है,
उसमें कुछ अल्फ़ाज़ हैं
जो मैंने नहीं लिखे...
शायद वो तेरे ख्वाबों से उतरे हैं।

मेरा कप नहीं —
तेरा इंतज़ार ठंडा हो रहा है,
और ये कमरा…
अब भी तुम्हारा नाम लेता है
हर साँस में।

सच कहूं,
ये रविवार की सुबह नहीं —
तेरे बिना एक
अधूरा दिन है।

#शांडिल्य

Thursday, August 14, 2025

सुनो,
हमसफ़र नहीं हो तुम
फिर भी कहीं न कहीं
सफर कर रहे हो तुम मेरे साथ हमेशा।
 
कभी बर्फीली पहाड़ियों पर,
कभी आसमान की बुलंदियों पर,
कभी मेरे सामने बैठे हो
तो कभी दूर खड़े मुस्करा रहे हो।

कभी दुनिया की भीड़ में
कभी रात की तनहाई में
कभी मेरी यादों में, कभी मेरे ख्यालों में।

#शांडिल्य 

Wednesday, August 13, 2025

"ए सुनो ,

मैंने व्रत नहीं रखा...
क्योंकि मैंने तुझे किसी देवता से नहीं माँगा —
मैंने तुझे अपने भाग्य की सबसे सुंदर चुप्पी में पाया है।
मैं मंदिर नहीं गया,
पर हर सोमवार तेरे नाम से उपवास हुआ —
न खाने से…
बल्कि तेरी यादों से,
जो रोटी से भी ज़्यादा ज़रूरी थीं। 
"मैं शिव से ये नहीं माँगता कि तू मेरी हो,
मैं तो बस कहता हूँ —
जिस जन्म में तेरे होंठों पर "ॐ" उभरे,
उस जनम में —
मैं तेरे पहले 'हर हर महादेव' की ध्वनि बन जाऊँ।

#शांडिल्य

Monday, August 11, 2025

बस यूँ ही गुज़र रहा है जो
वो सफर हूँ मैं
मंज़िल से होकर बेख़बर 
भटक रहा हूँ मैं
ग़र मुलाक़ात हो तो बताना
तलाश रहा हूँ मैं
साँसें उखड़ने लगीं हैं अब
यादें भी धुंधली पड़ने लगी हैं 
किस्मत अपनी बनाने को 
अब भी लड़ रहा हूँ मैं।

#शांडिल्य

Sunday, August 10, 2025

इन्द्रधनुष के रंगो सी है बचपन की वो यादे 
नहीं लौट कर आना चाहे कर लें कितनी फरियादें। 

गिल्ली डंडा आइस पाइस, पोसम पा का खेल 
पल में झगड़े पल में कर ले, अपने साथी से मेल। 

धूप की चिन्ता ना वर्षा की ,और न सर्दी डराए 
मन चंचल भौरा बन देखो, हर पल उड़ता जाए। 

#शांडिल्य

Wednesday, August 6, 2025

सुनो ना....
जानता हूँ,
तुम क्यूँ वो नहीं लिखती 
जो मैं पढ़ना चाहता हूँ,
तुम क्यूँ वो नहीं कहती 
जो मैं सुनना चाहता हूँ,
डरती हो ना !
कि हृदय से प्रेम छलक न जाए
कहीं तुम्हारे अनकहे शब्द मुझसे
प्रेम की रीत कह न जाए
कहीं तुम्हारे अनछुए स्पर्श
मुझे महसूस न हों जाए

#शांडिल्य 

Tuesday, August 5, 2025

मेरी थाम लो तुम हृदय डोर सजनी
न पाओगी तुम प्रेम का छोर सजनी। 

बँधी दिल के बन्धन हमारी उमंगें
कभी भाव मन की कटी जो पतंगें 

भिगोती हैं पलकें प्रणय कोर सजनी
चलो हाथ थामे छुएं नील नभ को

नहीं रास आता पिया साथ सबको
यहाँ दांव पेचों का है शोर सजनी। 
मेरी थाम लो तुम हृदय डोर सजनी।

#शांडिल्य

Friday, August 1, 2025

कितने समय हो गए है, 
तुमसे रूबरू हुए 
ग़र ,, सामने आ जाओ तो 
शायद कुछ बात बनें
निगाहों से जो छू लूँ ., तुम्हें,
तो जीने के हालात बनें,
गुलमोहर भी गिर चुके है,, 
इंतज़ार में देखो,,
तुम आओ, तो फिर से बागबां बनें ... !

#शांडिल्य