चाँद भी रात अकेला सफर करता है,
हर सितारा उसकी तन्हाई को पढ़ता है।
कभी बादल ओढ़ लेता है उसकी चुप्पी,
कभी समंदर उसे चुपचाप तकता है।
कोई कहे प्रेम का प्रतीक वो निर्मल,
कोई कहे विरह में तपता हुआ पल।
धरती से दूर, मगर सबका अपना,
हर रात नये ख्वाबों में उतरता है।
#शांडिल्य