Tuesday, December 30, 2025

चाँद भी रात अकेला सफर करता है,
हर सितारा उसकी तन्हाई को पढ़ता है।

कभी बादल ओढ़ लेता है उसकी चुप्पी,
कभी समंदर उसे चुपचाप तकता है।

कोई कहे प्रेम का प्रतीक वो निर्मल,
कोई कहे विरह में तपता हुआ पल।

धरती से दूर, मगर सबका अपना,
हर रात नये ख्वाबों में उतरता है।

#शांडिल्य

Saturday, December 27, 2025

एक रात होगी, कुछ खास होगी,
तेरी मेरी अधूरी मुलाकात होगी।

सितारों की चादर तले बैठकर,
तेरे ख्यालों से रोशन हर बात होगी।

एक रात,एक बात लिखूंगा,
तेरे संग अपने जज़्बात लिखूंगा।

ठंडी हवाओं की सरगम में,
तेरी हंसी का संगीत लिखूंगा।

#शांडिल्य

Friday, December 26, 2025

भींगे नयन पोल खोलते
मन में आकुलता बाकी है

व्यथित हृदय है, सूनी आँखें
थोड़ी व्याकुलता बाकी है

संदर्भ पुराने छूट गये
तृष्णा मन में बाकी है

नश्वरता को ढ़ूँढ़ेगा मन
एक मृगतृष्णा बाकी है

मरुभूमि में फूल खिला दूँ
मन की प्यास अभी बाकी है

#शांडिल्य

Thursday, December 25, 2025

पुरुष भी पवित्र प्रेम चाहते हैं! 
जिस्म की ख्वाहिश नही होती जिन्हें,
दिल के एहसास चाहते हैं।

हर वक्त आलिंगन न हो प्रेम में,
कुछ दिल के जज़्बात चाहते हैं। 

ज़रूरी नही नज़रे ख्वाहिश जताएं करीब आने की,
बस कुछ प्यार से लबरेज़ अल्फ़ाज़ चाहते हैं।
हर वक़्त झगड़ना नहीं चाहते है 

#शांडिल्य

Tuesday, December 23, 2025

सुनो ना.... 
वो मेरे अंदर जगह बना रही है ऐसे 
लहराती नदी सागर में सिमट रही है जैसे

मेरी कलम, अब मेरी ही बात मानती नहीं
मेरे अल्फाज सिर्फ उसके लिए ही लिखते हों जैसे

मैं उस शोख महबूबा की आँखों में नहीं देख पाता
मुझे लगता है, मैं उनमें ही डूब कर कही खो जाऊंगा जैसे

#शांडिल्य

Thursday, December 18, 2025

दर्द का कतरा कतरा पी कर
ख़्वाब न जाने कितने देखें हैं

रातों के स्याह सन्नाटों में
कई लोग टूटते देखें हैं

यूँ ही नहीं ये आँसू छलका है
हर रोज़ तमाशे देखें हैं

नींद की स्याही खो-खो कर
कुछ जज़्बात डूबते देखें हैं...

#शांडिल्य

Tuesday, December 16, 2025

नैनो मे भरकर चांद के दीदार की हसरत 
आसमान को एकटक निहारती वो रात
गुमसुम सी खामोश सी .वो रात

ओढ़कर अंधेरे की स्याह चादर
चाँद का इन्तजार करती वो रात
गुमसुम सी खामोश सी वो रात

बावरी है निरी पगली है शायद
नही पता उसे ये बात
रोज रोज कब होती है पूनम सी वो रात

#शांडिल्य

Sunday, December 14, 2025

ऐसा नही कि हम को मोहब्बत नही मिली...
जैसी चाहते थे हम को वो उल्फत नही मिली..!

मिलने को ज़िन्दगी में कई हमसफ़र मिले मुझको
पर उनकी तबियत से अपनी तबियत नही मिली..!

बनाने को हम भी बना लेते अपनी आदत किसी को..
मगर अफ़सोस कि किसी से मेरी आदत नही मिली..!

#शांडिल्य

Saturday, December 13, 2025

टूटे हुए ख़्वाब कहीं चुभ न जाएं आंखों में,
बड़े एहतियात से मसलना इन पलकों को,
बड़े चुगलखोर होते हैं, ये नामुराद अश्क़ भी,
कहीं ज़ाहिर न कर दें तेरी गम_ए_दास्ताँ को,
बड़ा संभाल के रखना इन अश्कों को।
जब तक सीने में हैं तेरे हैं,
बाहर निकलते ही बेगाने हो जाएंगे,

#शांडिल्य

Thursday, December 11, 2025

चलो जिंदगी खूबसूरत बनादूं
मुहब्बत के फूलों की खुशबू बनादूं

महक जाये तेरी,महक से ये दुनियां
तुझे ऐसी सुरभित पवन मै बनादूं

जिसे ढूढते ढूढते,तू गई थक
तुझे तेरी वो आज मंजिल मिलादूं

मधुर मीत हूँ तेरी दुनियांका शायद
मधुरता का तुझको मै सागर बनादूं
चलो जिंदगी खूबसूरत बना दूं

#शांडिल्य

Monday, December 8, 2025

सुनो प्रिय

एक बार प्रिय तुम 
आ जाना,
मधुर मिलन को आतुर है मन,
अधरों की मुस्कान 
जगा जाना,

बंधन मन का आलिंगन हिय का,
प्रेम सुधा बरसा जाना,
एक बार प्रिय तुम आस 
जगाने आ जाना,

बाट निहारु सदा तुम्हारी,
अपलक सजल नैनो से,
आंसू का एक मोती बनकर
प्रेम स्पर्श दे देना,

#शांडिल्य

Saturday, December 6, 2025

ख्याल कुछ
भीगे भीगे से हैं
मन की ज़मीन भी गीली  है

लगता है
आज फिर से 
यादों की फुहारें बरसी हैं। 

ज़िन्दगी
मीठी-मीठी सी है
मन में भी है मिठास घुली

लगता है
होठों ने आज फिर
तेरे नाम की मिश्री चख ली है...

आज हवाओं में 
फिर से मुझको 
एक पहचानी महक मिली है...

शायद तेरे साये को
छूकर
हवा कहीं से गुजरी है...

#शांडिल्य

Friday, December 5, 2025

आ मिलो न तुम करो अपने प्रेम का तुम बारिश 
भींगे हम दोनों तृप्त हो उठे प्यासा तन।

करो तुम अपने प्यार की बारिश 
भींग सके हमारा अतृप्त मन।

मैं प्रेम का सागर दिलवर 
नदी बन तुम मुझमें समझाओ

जीवन में मेरे स्वागत है तुम्हारा 
मेरे प्यासे दिल ने तुझको है पुकारा। 

#शांडिल्य

Thursday, December 4, 2025

भुलाकर 
सारे दर्द और ग़म ज़िन्दगी के
एकबार फिर से नादान होना चाहता हूँं... 

मुस्कुराहटों के 
उन्मुक्त गगन में 
परिंदा अंजान होना चाहता हूँं...

भूलकर उदासियां और तकलीफों के किस्से....
कुछ पलो के लिए गलतियो में
गुमनाम होना चाहता हूँ.....

#शांडिल्य

Monday, December 1, 2025

प्रेम एक शब्दकोश होता है
जो जोड़ता है रिश्तों के एक एक पन्ने को
जिसकी हर पंक्ति सराबोर होती है
स्नेहिल एहसासों से,
हर शब्दों में निहित होता शब्दों का भाव
आत्मीयता के उद्गार से सजी एक एक कविता
खींचती है अपनी ओर।
आत्मीयता और संवेदना से अभिभूत अनुभूति
जिसे हम प्रेम कहते हैं।

#शांडिल्य